
नई दिल्ली:
फिल्म ‘बैटल ऑफ गलवान’ के टीज़र ने रिलीज़ होते ही जहां भारत में देशभक्ति की भावना को और प्रबल कर दिया है, वहीं चीन इससे बुरी तरह तिलमिला गया है। गलवान घाटी की ऐतिहासिक झड़प को सिल्वर स्क्रीन पर दिखाए जाने से चीन असहज नजर आ रहा है और अब वह फिल्म के तथ्यों को नकारने के साथ-साथ एक बार फिर अपनी पुरानी दलीलों को दोहराने लगा है। चीन की ओर से दावा किया गया है कि गलवान घाटी में वास्तविक नियंत्रण रेखा (LAC) पार करने की पहल भारतीय सेना ने की थी। चीन ने कहा है कि उसकी सेना पीपुल्स लिबरेशन आर्मी (PLA) के नई पीढ़ी के जवान देश की संप्रभुता और क्षेत्रीय अखंडता की रक्षा के लिए पूरी मजबूती से डटे हुए हैं। चीन ने यह भी संकेत दिया कि फिल्म के माध्यम से तथ्यों को “तोड़-मरोड़कर” पेश किया जा रहा है।.दरअसल, ‘बैटल ऑफ गलवान’ फिल्म 2020 में हुई उस हिंसक झड़प पर आधारित है, जिसमें भारतीय सेना के जवानों ने अदम्य साहस और शौर्य का परिचय दिया था। इस संघर्ष में भारतीय सैनिकों ने बिना गोली चलाए, कठिन परिस्थितियों में चीनी सैनिकों का सामना किया था। यह घटना भारत-चीन संबंधों में एक महत्वपूर्ण मोड़ मानी जाती है। फिल्म के टीज़र में भारतीय सैनिकों की बहादुरी और बलिदान को दर्शाया गया है, जिसे लेकर चीन की नाराजगी सामने आई है। विश्लेषकों का मानना है कि चीन को यह डर सता रहा है कि गलवान संघर्ष की सच्चाई एक बार फिर वैश्विक मंच पर चर्चा में आ जाएगी और उसकी अंतरराष्ट्रीय छवि को नुकसान पहुंच सकता है।
भारत की ओर से पहले ही स्पष्ट किया जा चुका है कि गलवान घाटी भारत का अभिन्न हिस्सा है और भारतीय सेना अपने क्षेत्र में ही गश्त कर रही थी। भारत ने हमेशा यह रुख अपनाया है कि सीमा पर शांति और स्थिरता दोनों देशों के हित में है, लेकिन संप्रभुता से किसी भी प्रकार का समझौता नहीं किया जाएगा। फिल्म के बहाने एक बार फिर गलवान संघर्ष चर्चा के केंद्र में आ गया है और चीन की प्रतिक्रिया यह दिखाती है कि यह मुद्दा आज भी उसके लिए संवेदनशील बना हुआ है। आने वाले समय में यह देखना दिलचस्प होगा कि ‘बैटल ऑफ गलवान’ फिल्म दोनों देशों के बीच कूटनीतिक और जनमत स्तर पर किस तरह की बहस को जन्म देती है।
