
महाराष्ट्र के अंबरनाथ में नगर निगम की राजनीति में बड़ा सियासी उलटफेर देखने को मिला है। चुनाव के बाद पहले गठबंधन टूटने से कांग्रेस को झटका लगा और अब उसके सभी 12 नवनिर्वाचित पार्षदों के भारतीय जनता पार्टी में शामिल होने से सियासी सरगर्मी और तेज हो गई है। इस घटनाक्रम ने स्थानीय राजनीति के समीकरण पूरी तरह बदल दिए हैं। जानकारी के मुताबिक, नगर निगम चुनाव में जीत दर्ज करने के बाद कांग्रेस के इन पार्षदों ने बीजेपी के साथ हाथ मिला लिया था। इस फैसले को पार्टी नेतृत्व ने अनुशासनहीनता मानते हुए सभी 12 पार्षदों को निलंबित कर दिया था। इसके बावजूद अब इन पार्षदों ने औपचारिक रूप से बीजेपी की सदस्यता ग्रहण कर ली है। इस घटनाक्रम को कांग्रेस के लिए बड़ी सियासी चोट के तौर पर देखा जा रहा है।

बीजेपी में शामिल हुए पार्षदों का कहना है कि उन्होंने यह कदम क्षेत्र के विकास और स्थिर प्रशासन के लिए उठाया है। उनका दावा है कि नगर निगम में मजबूत सरकार बनने से अंबरनाथ के विकास कार्यों को गति मिलेगी। वहीं बीजेपी नेताओं ने कांग्रेस से आए पार्षदों का स्वागत करते हुए कहा कि पार्टी की नीतियों और नेतृत्व पर भरोसा जताकर उन्होंने सही फैसला लिया है। दूसरी ओर कांग्रेस ने इस घटनाक्रम को जनादेश के साथ विश्वासघात बताया है। कांग्रेस नेताओं का आरोप है कि सत्ता और दबाव की राजनीति के चलते उनके पार्षदों को तोड़ा गया है। पार्टी का कहना है कि जनता ने इन्हें कांग्रेस के प्रतीक चिह्न पर चुना था और अब उनका बीजेपी में जाना नैतिकता के खिलाफ है। अंबरनाथ की राजनीति में इस बड़े फेरबदल के बाद नगर निगम में बीजेपी की स्थिति और मजबूत हो गई है। राजनीतिक जानकारों का मानना है कि इस घटनाक्रम का असर केवल स्थानीय राजनीति तक सीमित नहीं रहेगा, बल्कि आने वाले समय में महाराष्ट्र की सियासत पर भी इसके संकेत दिखाई दे सकते हैं।
